Dhurandhar Review: सच, साहस आ बलिदान के असल चेहरा देखावे वाली सिनेमा की ईमानदार प्रस्तुति।
भारत के सुरक्षा आ गुमनाम सिपाहियन के असल संघर्ष पर बनल फिलिम ‘Dhurandhar’ बॉक्स ऑफिस पर ना, दर्शकन के दिल में लहर मचा दिहले बा। ई फिलिम ओह लोगन के कहानी उजागर करे खातिर बनल बा, जवन अंधेरा में देश खातिर लड़त रहलें, बाकिर कबहियो सुर्खी में ना आइलें।
Dhurandhar मजा देवे वाला मसाला फिलिम ना ह।
ई एक महागाथा ह—
गुमनाम जवान, गुप्त एजेंट, इंटेलिजेंस ऑफिसर आ ओह सभी लोगन के
जिनकर बलिदान पर भारत खड़ा बा,
बाकिर जिनके नाम इतिहास अपना फाइल में चुपचाप दबा लेता।
फिलिम ऊ दौर दिखावेला—
- जब प्लेन हाईजैक आम बात बन गइल रहे,
- जब संसद के भीतर गोली के आवाज गूंजत रहे,
- जब मुंबई के सड़क पर आग मानवता के चीर देत रहे,
- आ जब पाकिस्तान फर्जी करेंसी के सहारा ले भारत के अर्थव्यवस्था पर जंग छेड़ले रहे।
ई अंधेरा में अनगिनत धुरंधर खामोशी से लड़त रहलें।
फिलिम ओही अंधेरा में टॉर्च जरा देला।
अभिनय, निर्देशन आ भावनात्मक ताकत—तीनों में कमाल
• अक्षय खन्ना – गहिरा, ईमानदार अउर बेहद प्रभावी अभिनय।
• संजय दत्त आ अर्जुन रामपाल – किरदार में दम, गंभीरता आ वजन भर देताड़।
• सारा अर्जुन – नया चेहरा, बाकिर अभिनय में परिपक्वता चौंकावे वाला।
• आर. माधवन – फिलिम के शुरुआती फ्रेम से कहानी के पकड़ लेताड़।
• रणवीर सिंह – ई बार ओवरएनेर्जी ना, खामोशी में भरा गुस्सा… जे पर्दा चीर देला।
फिलिम के हर फ्रेम सच्चाई से भरल बा। फिलिम लंबा जरूर बा, बाकिर एको मिनट भारी ना लागेला। इंटरवल भी 2 घंटा बाद आवेला, आ तब मन पूछेला—“एतना जल्दी?”
निर्देशक आदित्य धर—ईमानदारी के नया मापदंड
जहां आजकल के सिनेमा CGI, गाना आ मसाला पर टिक गइल बा, ओहिजा आदित्य धर सच दिखावे के जोखिम लेले बाड़े। गुमनाम नायकों की जीवनयात्रा के यथार्थ में उतारल—ई कोशिश प्रशंसनीय बा आ बेहद जरूरी भी।
सबसे बड़ खुलासा: Dhurandhar Part 2 चार महीना बाद रिलीज़ होखी
कंटेंट पर भरोसा कइसन होला, विजन पर खड़ा रहना कइसन होला—ओकर सबसे बड़ा उदाहरण ई बा कि दूसरा पार्ट पहले से बनल तैयार बा।
निष्कर्ष: एक फिलिम ना, देशभक्ति के स्मारक
अगर जवान–पठान–टाइगर मनोरंजन देला, त Dhurandhar आत्मा हिला देला। ई फिलिम उनही निस्वार्थ वीरन के समर्पित बा—जिन्हीं बिना तालियां, बिना सम्मान, भारत के सुरक्षित राखलें।
भारत आज मजबूर ना, मजबूत बा। काहे कि ओकर पीछे असल ‘धुरंधर’ खड़ा बाड़े।
नोट - फ़िल्म के समीक्षा कई गो अलग अलग समीक्षक लोगन के समीक्षा से साभार प्रेरणा लेके लिखायील बा।
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