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भाग्य से बड़ा संघर्ष: ‘लकीरें मिटती नहीं’ बनल युवा पीढ़ी के दिल के आवाज़।

भाग्य से बड़ा संघर्ष: ‘लकीरें मिटती नहीं’ बनल युवा पीढ़ी के दिल के आवाज़।


हथेली के लकीर से आगे: संघर्ष अउर हौसला के प्रेरक कहानी”



कुछ कहानी अइसन होला जे खाली पढ़ल ना जाला, बल्कि दिल से महसूस कइल जाला। अइसहीं एगो प्रेरणादायक उपन्यास “लकीरें मिटती नहीं” बहुत जल्द पाठकन के हाथ में आवे जा रहल बा।


ई कहानी खाली किस्मत अउर हथेली के लकीरन के बात नइखे करत, बल्कि ई सवाल उठावेला कि —

का तकदीर सब कुछ तय करेला?

का मेहनत से लकीरन के दिशा बदले जा सकेला?

का हालात इंसान के गढ़ेला?

कि हौसला ओकरा के नया पहचान देला?


ई उपन्यास संघर्ष, संयम अउर आत्मविश्वास के एगो संवेदनशील आवाज़ ह। हर पन्ना पाठक के दिल के छू लेवे वाला बा अउर हर शब्द सोच में डूबा देवे वाला बा।


“लकीरें मिटती नहीं” लेखक ई. संदीप तिवारी के पहिला उपन्यास ह। संदीप जी बतवानी कि एह किताब में एगो ग्रामीण युवक के शिक्षा, संघर्ष, सपना अउर आत्मविश्वास से भरल प्रेरक यात्रा के बहुत सशक्त ढंग से प्रस्तुत कइल गइल बा।



उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के निवासी ई. संदीप तिवारी ग्रामीण परिवेश में पल-बढ़ के जीवन के संघर्ष, सामाजिक यथार्थ अउर आम जनमानस के भावना के बहुत नजदीक से महसूस कइले बाड़ें। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करे के बावजूद साहित्य के प्रति उनकर गहर रुचि लेखन के राह पकड़वले।


उनकर लेखन में गाँव के सादगी, युवा संघर्ष के सच्चाई अउर नैतिक मूल्य के गूंज साफ सुनाई देला। ई उपन्यास खास तौर पर युवा पीढ़ी खातिर प्रेरणा के स्रोत बन सकेला।


साहित्य प्रेमी लोगन में एह किताब के लेके उत्साह तेजी से बढ़ रहल बा। मानल जा रहल बा कि ई उपन्यास ग्रामीण भारत के वास्तविक जीवन संघर्ष के आवाज़ बन सकेला।


बहुत जल्द अप्रैल 2026 के मध्य तक ई खास कहानी रउरा सभे के हाथ में होई। ई किताब "मिलान प्रकाशन समूह" से आवता आ ऑनलाइन: अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल, मिसो,अमेज़न अंतर्राष्ट्रीय, ऑथर वेबसाइट तथा अन्य वेबसाइट पर उपलब्ध होई।

ऑफ़लाइन: अस्सी घाट (वाराणसी), लंका, लखनऊ (ट्रांसपोर्ट नगर), गोवा, चेन्नई (चेंगलपट्टू, तमिलनाडु), रायपुर, अहमदाबाद, असम आदि स्थानन पर उपलब्ध रही।

तैयार हो जाईं… खुद से मिले खातिर।


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