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14 अप्रैल : पुण्यतिथि विशेष : हिंडाल्को के महाराणा प्रताप रहलें मजदूर नेता रामदेव सिंह।


14 अप्रैल : पुण्यतिथि विशेष




हिंडाल्को के महाराणा प्रताप रहलें मजदूर नेता रामदेव सिंह




महाराणा प्रताप अपना संघर्ष के दिनन में घास के रोटी खा के जिनिगी बितवले रहलें। ओही तरह हिंडाल्को, रेनूकूट के मजदूर नेता रामदेव सिंहो 14 बरिस तक कंपनी से बाहर बेरोजगार रहि के मजदूरन के हक खातिर हिंडाल्को प्रबंधन से लड़त रहलें। गरीबी, अभाव आ मुफलिसी में जीवन बितवलें, बाकिर कबो झुकलें ना, टूटलें ना। ऊ लगातार अन्याय के ललकारत रहलें, चुनौती देत रहलें।


एशिया के सबसे बड़ एल्यूमिनियम कंपनी हिंडाल्को के साजिश, चालबाजी आ जानलेवा हमला से बचे खातिर ऊ विंध्य पर्वत के गोद में बसल मिर्जापुर(सोनभद्र) इलाका में बार-बार आपन ठिकाना बदलत रहलें। कई बेर भूखे रहि के आ जंगल में मिलल फल-फूल खा के आपन मिशन जारी रखलें।


क्षत्रिय परिवार में जनमल रामदेव बाबू महाराणा प्रताप के आजीवन अपना आदर्श मानत रहलें आ उन्हीं के राह पर चलत रहलें।


आज रामदेव बाबू के पुण्यतिथि बा। 14 अप्रैल 2022 के 87 बरिस के उमिर में उहाँ के निधन हो गइल। मजदूरन के मसीहा कहल जाए वाला रामदेव बाबू के राजनीतिक सफर इतिहास के पन्ना में भले कम लिखाइल होखे, बाकिर लोकस्मृति में ऊ आजुओ जिंदा बाड़ें। हजारों लोगन के रोजगार दिलवले, रेनूकूट के व्यापारी आ दुकानदारन के बसवले, आ असहाय लोगन के साथ जीवन भर खड़ा रहलें।


आजुओ लोग कहेला —

“आदमी में नउआ, पंछी में कउआ आ नेतवन में रमदेउआ।”

ई कहावत सुनते लोगन के चेहरा पर मुस्कान आ आंख में नमी आ जाला।


14 बरिस के बनवास, बाकिर संघर्ष जारी रहल



रामदेव बाबू 14 साल तक बेरोजगार रहलें, बाकिर मजदूर आंदोलन से कबहूँ पीछे ना हटले। उनकर परिवारो अभाव में जीवन काटलस, बाकिर संघर्ष के राह ना छोड़लस। साल 1977 में समाजवादी नेता राजनारायण के प्रयास से ऊ फेरु हिंडाल्को में नौकरी जॉइन कइलें।


एह दौरान कंपनी के तमाम लालच, प्रलोभन आ दबाव के बावजूद ऊ कबो अपना जमीर ना बेचले।





एक आवाज पर बंद हो गइल हिंडाल्को के चिमनी



12 अगस्त 1966 के रामदेव सिंह के एक आवाज पर हिंडाल्को के पूरा प्लांट ठप पड़ गइल रहे। चिमनी से उठे वाला धुआँ बंद हो गइल। मजदूरन के भारी समर्थन के चलते प्रबंधन के झुकल पड़ल।


वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता लल्लन राय के अनुसार, “रामदेव बाबू सिर्फ मजदूर नेता ना, जनता के जननेता रहलें। रेनूकूट के चमकत बाजार, दुकानदारन के बसावट आ छोट व्यापारियन के पहचान देवे में उनकर बहुत बड़ योगदान रहल।”





किसान के बेटा से मजदूर नेता बने तक के सफर



बिहार के सिवान जिला के कौंसड़ गाँव में जनमल रामदेव सिंह एक सामान्य किसान परिवार से रहलें। 18 बरिस के उमिर में नौकरी के तलाश में घर छोड़ले आ धीरे-धीरे रेनूकूट पहुंचलें।


हिंडाल्को के पॉट रूम में खतरनाक हालात में मजदूरन के काम करत देख के उनकर भीतर के क्रांतिकारी जाग उठल। मजदूरन के दयनीय हालत देख ऊ सीधे प्रबंधन से भिड़ गइलें।


चेतावनी पत्र के अधिकारी के सामने सुलगता सिगरेट से जरा देवे के घटना आजुओ लोग याद करेला। कुछे दिन में रामदेव सिंह मजदूरन के नेता बन गइलें।





अंत समय तक सच्चा समाजवादी रहलें



रामदेव बाबू के घर पर अक्सर बड़े समाजवादी नेता लोग के आना-जाना लागल रहत रहे। राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, राजनाथ सिंह जइसन नेता लोग उनकर सम्मान करत रहे।


अपने एक साक्षात्कार में रामदेव बाबू कहलें कि:

“गलत कमाई आ हराम के पैसा कबो ना छुइनी। ना संपत्ति बनवनी, ना गाड़ी। बस धोती-कुर्ता, छाता आ पुरान बक्सा बा।”


ई शब्द आजुओ उनकर ईमानदारी आ संघर्ष के गवाही देला।





विनम्र श्रद्धांजलि



मजदूरन के हक खातिर पूरा जीवन समर्पित करे वाला, अन्याय के सामने कबो ना झुके वाला, जननेता रामदेव सिंह आजुओ प्रेरणा के स्रोत बाड़ें।


उनका पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।


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